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अब पछताए होत क्या, चिड़िया चुग गयी खेत
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अब पछताए होत क्या, चिड़िया चुग गयी खेत

आछे दिन पाछे गए, हरि से किया न हेत । अब पछताए होत क्या, चिड़िया चुग गयी खेत ॥ अर्थ : सुख के समय में भगवान् का स्मरण नहीं किया, तो अब प...
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कबीर के दोहे:-1
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कबीर के दोहे:-1

बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय, जो दिल खोजा आपना, मुझसे बुरा न कोय। अर्थ :  जब मैं इस संसार में बुराई खोजने चला तो मुझे कोई बु...
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